विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय के अवशेषों को अपने आंचल में समेटे नालन्दा
बिहार का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां सुदूर देशों से छात्र अध्ययन के लिये भारत आते थे।नालन्दा विश्वविद्यालय के अवशेषों की खोज अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। माना जाता है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई में गुप्त शासक कुमारगुप्त ने की थी। इस विश्वविद्यालय को इसके बाद आने वाले सभी शासक वंशों का समर्थन मिला। बुद्ध और महावीर कई बार नालन्दा मे ठहरे थे। माना जाता है कि महावीर ने मोक्ष की प्राप्ति पावापुरी मे की थी, जो नालन्दा से क़रीब है गौतम बुद्ध के प्रमुख छात्रों मे से एक, शारिपुत्र, का जन्म नालन्दा में ही हुआ था। कहा जाता है कि 12वीं सदी में बंगाल पर क़ब्ज़ा करने वाले एख़्तेयारूद्दीन अहमद बिन बख्तियार खलजी ने इस विश्वविद्यालय को जला डाला। यहां पर्यटक विश्वविद्यालय के अवशेष, संग्रहालय, नव नालंदा महाविहार तथा ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल देख सकते हैं। इसके अलावा इसके आस-पास में भी घूमने के लिए बहुत से पर्यटक स्थल है। राजगीर, पावापुरी, गया तथा बोध-गया यहां के नजदीकी पर्यटन स्थल है।
प्रमुख आकर्षण--- प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेषों का परिसर 14 हेक्टेयर क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं। खुदाई में मिली सभी इमारतों का निर्माण लाल पत्थर से किया गया था। यह परिसर दक्षिण से उत्तर की ओर बना हुआ है। मठ या विहार इस परिसर के पूर्व दिशा में स्थित थे
जबकि मंदिर या चैत्य पश्चिम दिशा में। वर्तमान समय में भी यहां दो मंजिला इमारत मौजूद है। यह इमारत परिसर के मुख्य आंगन के समीप बनी हुई है। संभवत: यहां ही शिक्षक अपने छात्रों को संबोधित किया करते थे। इस विहार में एक छोटा सा प्रार्थनालय भी अभी सुरक्षित अवस्था में बचा हुआ है। इस प्रार्थनालय में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा भग्न अवस्था में है। यहां स्थित मंदिर नं 3 इस परिसर का सबसे बड़ा मंदिर है। इस मंदिर से समूचे क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यह मंदिर कई छोटे-बड़े स्तूपों से घिरा हुआ है। इन सभी स्तूपो में विभिन्न मुद्राओं में भगवान बुद्ध की मूर्तियां बनी हुई है।
बिहार का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां सुदूर देशों से छात्र अध्ययन के लिये भारत आते थे।नालन्दा विश्वविद्यालय के अवशेषों की खोज अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। माना जाता है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई में गुप्त शासक कुमारगुप्त ने की थी। इस विश्वविद्यालय को इसके बाद आने वाले सभी शासक वंशों का समर्थन मिला। बुद्ध और महावीर कई बार नालन्दा मे ठहरे थे। माना जाता है कि महावीर ने मोक्ष की प्राप्ति पावापुरी मे की थी, जो नालन्दा से क़रीब है गौतम बुद्ध के प्रमुख छात्रों मे से एक, शारिपुत्र, का जन्म नालन्दा में ही हुआ था। कहा जाता है कि 12वीं सदी में बंगाल पर क़ब्ज़ा करने वाले एख़्तेयारूद्दीन अहमद बिन बख्तियार खलजी ने इस विश्वविद्यालय को जला डाला। यहां पर्यटक विश्वविद्यालय के अवशेष, संग्रहालय, नव नालंदा महाविहार तथा ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल देख सकते हैं। इसके अलावा इसके आस-पास में भी घूमने के लिए बहुत से पर्यटक स्थल है। राजगीर, पावापुरी, गया तथा बोध-गया यहां के नजदीकी पर्यटन स्थल है। प्रमुख आकर्षण--- प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेषों का परिसर 14 हेक्टेयर क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं। खुदाई में मिली सभी इमारतों का निर्माण लाल पत्थर से किया गया था। यह परिसर दक्षिण से उत्तर की ओर बना हुआ है। मठ या विहार इस परिसर के पूर्व दिशा में स्थित थे
जबकि मंदिर या चैत्य पश्चिम दिशा में। वर्तमान समय में भी यहां दो मंजिला इमारत मौजूद है। यह इमारत परिसर के मुख्य आंगन के समीप बनी हुई है। संभवत: यहां ही शिक्षक अपने छात्रों को संबोधित किया करते थे। इस विहार में एक छोटा सा प्रार्थनालय भी अभी सुरक्षित अवस्था में बचा हुआ है। इस प्रार्थनालय में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा भग्न अवस्था में है। यहां स्थित मंदिर नं 3 इस परिसर का सबसे बड़ा मंदिर है। इस मंदिर से समूचे क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यह मंदिर कई छोटे-बड़े स्तूपों से घिरा हुआ है। इन सभी स्तूपो में विभिन्न मुद्राओं में भगवान बुद्ध की मूर्तियां बनी हुई है।नालन्दा पुरातत्वीय संग्रहालय--- विश्वविद्यालय परिसर के विपरीत दिशा में एक छोटा सा पुरातत्विक संग्रहालय बना हुआ है। इस संग्रहालय में खुदाई से प्राप्त अवशेषों को रखा गया है। इसमें भगवान बुद्ध की विभिन्न प्रकार की मूर्तियों का अच्छा संग्रहहै। साथ ही बुद्ध की टेराकोटा मूर्तियां और प्रथम शताब्दी के दो जार भी इस संग्रहालय में रखे हए हैं। इसके अलावा इस संग्रहालय में तांबे की प्लेट, पत्थर पर खुदा अभिलेख, सिक्के, बर्तन तथा 12वीं सदी के चावल के जले हुए दाने रखे हुए हैं। इसके खुलने का समय सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक है और शुक्रवार को यह बंद रहता है। नव नलन्दा महाविहार--- यह एक शिक्षा संस्थान है। इसमें पाली साहित्य तथा बौद्ध धर्म की पढ़ाई तथा अनुसंधान होता है। यह एक नया संस्थान है। यहां दूसरे देशों के छात्र भी पढ़ाई के लिए आते हैं।
ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल---- यह एक नवर्निमित भवन है। यह भवन चीन के महान तीर्थयात्री ह्वेनसांग की याद में बनवाया गया है। इसमें ह्वेनसांग से संबंधित वस्तुओं तथा उनकी मूर्ति देखी जा सकता हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा पटना का जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा है जो यहां से 89 किलोमीटर दूर है। कोलकाता, रांची, मुंबई, दिल्ली तथा लखनऊ से पटना के लिए सीधी हवाई सेवा उपलब्ध है। नालन्दा में रेलवे स्टेशन भी है। लेकिन यहां का प्रमुख रेलवे स्टेशन राजगीर है। राजगीर जाने वाली सभी ट्रेने नालंदा होकर जाती हैं। नालंदा सड़क मार्ग द्वारा राजगीर (15 किमी), बोध-गया (110 किमी), गया (95 किमी), पटना (90 किमी), पावापुरी (26 किमी) तथा बिहार शरीफ (13 किमी) से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। ज्यादातर पर्यटक राजगीर में ठहरना पसंद करते हैं। राजगीर में सामान्य दरों काफ़ी हॉटल मिल जाते हैं । पर्यटक बिहार स्टेट टूरीज़म के बने 3गेस्ट हाउस (तथागत विहार, अजातशत्रु विहार और गौतम विहार) में भी ठहर सकते हैं। यहां की स्थानीय कला और कारीगरी, शिल्पकला और मधुबनी पेंटिंग बहुत मशहुर हैं। इनकी खरीदारी कुंड़ एरीया के मेन मार्केट की हैंडीक्राफट शॉप और एरीयल रोपवे से की जा सकती है।
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